Tuesday, August 17, 2010

आरक्षण नीति



आरक्षण एक ऐसा मुद्दा है जो ज्वलन्त रहता है और इस पर व्यक्तियों के विचार स्वार्थ भावना से लिप्त होते हैं। आरक्षण पाने वाले की दृष्टि से आरक्षण ‘‘मिलना चाहिए’’ व न पाने वालों के विचारानुसार ‘‘नहीं मिलना चाहिए’’। परन्तु यदि इस स्वार्थ भावना से ऊपर उठकर, प्रारम्भ आरक्षण की आवश्यकता से करें अर्थात् ‘‘क्या प्रगतिशील भारत में आज भी भारतीयों की उन्नति की नींव आरक्षण है?’’ तो कड़वा ही सही परन्तु सत्य यही है कि ‘‘आज भी कुछ वर्ग विशेष ऐसा है जिसे आरक्षण की आवश्यकता है।’’
अब प्रश्न यह उठता है कि आरक्षण की आवश्यकता क्यों है? आरक्षण की आवश्यकता समाज की उस गरीब व कमजोर वर्ग को ऊपर उठाने के लिए है जो देश की प्रगति में बाधक इसके असहयोग के कारण बन रहा है। उन्नति चहुँमुखी विकास पर निर्भर करती है अतः यह आवश्यक हो गया है कि इस वर्ग विशेष को भी अन्य वर्गों की श्रेणी तक लाने का प्रयास किया जाये। इन्हीं प्रयासों की एक कड़ी है- आरक्षण नीति। यह एक प्रकार की सहायता मात्र है। जो लोग सुविधाओं के अभाव में भी जीवन में कुछ पाने की इच्छा रखते हुए प्रयत्न करते हैं उनकी प्रगति में इस सहयोग का विरोध करने वालों को समझना चाहिए कि यह देश के लिए कितना हितकर है अब प्रश्न यह उठता है कि आरक्षण का आधार क्या हो?
आज भी तीस करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जिन्दगी बसर कर रहे हैं। पढ़ाई-लिखाई, उन्नति-प्रगति शब्दों से शायद ही कभी रू-ब-रू हुए हों। भूख प्यास से बिलखती ये जिन्दगियाँ आमन्त्रित करती है आरक्षण नीति को। ये हैं आरक्षण की नींव। आरक्षण की आधार शिला जाति या वर्ग विशेष न होकर अमीरी-गरीबी की तराजू होनी चाहिए। आरक्षण का उद्देश्य है पिछड़े लोगों को मानसिक विकास हेतु उपयुक्त साधन उपलब्ध करना है। अतः इसका आधार वे लोग कदापि नहीं हो सकते जो न केवल मानसिक रूप से अपितु आर्थिक रूप से भी स्वस्थ हैं। आवश्यकता समाज के गरीब वर्ग को आरक्षित करने की हैै।
आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर के नियम की सख्ती से पालन किया जाये तथा इसमें राजनीतिज्ञों को छूट कतई ना दी जाये। राजनीति समाज सेवा का कार्य पहले हुआ करता था अब यह एक पेशा तथा कमाई का धन्धा मात्र रह गया है।
देश के राजनीतिक वातावरण में किसी गरीब या सामान्य जन की हैसियत राजनीति की लाइन पर चलनेे की नहीं रह गई है।
यह सच है कि यह प्र्रयास कठिन हो सकता है परन्तु असम्भव नहीं हो सकता। परन्तु इस कठिन प्रयास को क्रियान्वित करने से पहले समाज के उस वर्ग को नियन्त्रित करना होगा जो घूसखोरी, जालसाजी जैसे कार्यों में व्यस्त हैं। इस प्रकार अपनाई गई नीति से न केवल आरक्षित वर्ग लाभान्वित होगा अपितु यदि रिश्वतखोरी आदि क्रियाओं पर अंकुश लगा सके तो देश की उन्नति में यह प्रयास सार्थक हो जायेगा और हम उस देश में सांस लेंगे जिसकी कल्पना हमारे शहीदों ने की थी।

2 comments:

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    सुशील गंगवार
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  2. कृपया जलेस मेरठ ब्लॉग पर आरक्षण विषयक आलेख देखने का कष्ट करें | आपके विचारों को और बल मिलेगा |इस ब्लॉग को फालो भी करें |

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